3 प्राणायाम भोजन के बाद
ऑक्सीजन की कमी तो नहीं कर रहा एक्सरसाइज या गलत योगासन ? फिटनेस के नाम पर कहीं खुद को आप जोखिम में तो नहीं डाल रहें ? हम जानते हैं कि शरीर में कई तरह की व्यवस्थाएं हैं। हमारा शरीर महज बाहरी आवरण ही नहीं है, बल्कि एक आंतरिक सिस्टम भी है। आंतरिक शारीरिक व्यवस्था में हॉर्मोंस हैं, आंतरिक अंग हैं, ऑक्सीजन व पोषक तत्व की आपूर्ति की व्यवस्था जैसे कई तंत्र हैं। इन आंतरिक अंगों को सेहतमंद रखने में अहम भूमिका निभाता है- ऑक्सीजन । अगर हम कुछ दिनों के लिए भोजन करना छोड़ दें, पानी पीना छोड़ दें, तो तुरंत हमारी मृत्यु नहीं होगी। वहीं ऑक्सीजन की आपूर्ति अगर दो मिनट भी बाधित हो जाए तो व्यक्ति की मौत हो सकती है। मतलब ऑक्सीजन सबसे जरूरी तत्व है , हमारे जीवनरुपी गाड़ी को चलाने के लिए । 

एक्सरसाइज के नाम पर उछलकूद से बचें 

यदि आप कोई एक्टिविटी करते हैं तो ऑक्सीजन की खपत ज्यादा होती है। आप कुछ देर तक चलते हैं या दौड़ते हैं तो आप थक जाते हैं, क्योंकि शरीर का ऑक्सीजन खर्च हुआ है। इस तरह से ऑक्सीजन हमारे शरीर का मुख्य ईंधन है। इसलिए अगर आप एक्सरसाइज के नाम पर उछलकूद करते हैं तो आप अपने भीतर के ऑक्सीजन को ज्यादा गंवा रहे होते हैं। दुर्भाग्य से इन दिनों योगासन को भी एक्सरसाइज बना दिया गया है उससे भी आप ऑक्सीजन को खो रहे हैं। ऑक्सीजन की ये कमी आने वाले समय में आपके शरीर के अंग को नुकसान या समय से पहले बीमार कर सकता है। 

क्या करें कि हर अंग में ऑक्सीजन पहुंचे ?

योगशास्त्र ने उस विज्ञान को समझा जिससे हमारा शरीर चलता है। इसलिए योगासन को इस तरीके से तैयार किया गया जिससे शरीर के हर अंग-प्रत्यंग में ऑक्सीजन पहुंचे। अगर आप सही तरीके से भारत की सनातन परंपरा के अनुसार (वशिष्ठ योग आश्रम के योगगुरु धीरज जिसका जिक्र बार-बार करते हैं ) आसन में स्थिर होते हैं तो ऑक्सीजन की कम खपत होगी। योगासन में स्थिर रहने और लंबी सांस लेते रहने से रक्त के प्रवाह से शरीर के विभिन्न अंगों में ऑक्सीजन हम ज्यादा पहुंचा पाते हैं। इससे हम बेहतर स्वास्थ्य को प्राप्त करते हैं और मन आनंद से भरा रहता है। 

शरीर को बीमार होने से ऐसे बचाएं 

इसलिए, एक बात गांठ बांध लें कि योग के नाम पर जो पागलपन चल रहा है उससे बचें। बहुत तेज गति से कई राउंड सूर्यनमस्कार करना, एक्सरसाइज के नाम पर उछलकूद करने से कोई फायदा नहीं होने वाला है। उल्टे आप थक जाएंगे।  ये थका-हारा आपका शरीर धीरे-धीरे निराश और बीमार होने लगेगा। उदाहरण के लिए अगर आप सौ रुपये कमाते हैं और 200 रुपये खर्च कर देते हैं तो आपके हाथ में क्या आने वाला है? आप उधारी में चले जाएंगे। उसी तरह से एक्सरसाइज के नाम से उछलकूद कर आपने ऑक्सीजन ज्यादा गंवा दिया, आपके शरीर में कार्बन डाइऑक्साइड ज्यादा आ गया तो आप बीमार ही होने वाले हैं।

अभ्यास में स्थिरता नहीं तो लूट जाएगी पूंजी 

इससे बचने के लिए जो सनातन यौगिक पद्धति है उसको अपनाने की जरूरत है। महर्षि पतंजलि ने क्या कहा है ‘प्रयत्न-शैथिल्य’ लेकिन आजकल जो दिखाया जा रहा है वो सारा ‘प्रयत्न’ के सिवा कुछ नहीं है। महर्षि पतंजलि के सनातन संदेश को भुला दिया गया है, हां बिजनेस जरुरी चमका, लेकिन इससे आम जन को लाभ नहीं। महर्षि पतंजलि कहते हैं ‘स्थिरम सुखम आसनम’- यानि जो पूरी तरह स्थिर और सुखदायक हो, वही आसन है। अगर अभ्यास में स्थिरता नहीं रहेगी तो शरीर में प्राण और ऑक्सीजन की कमी हो जाएगी।

ऑक्सीजन भरपूर तो झंकृत होंगे प्राण 

इसलिए योग और एक्सरसाइज के नाम पर शरीर को सताना नहीं है। इस उदाहरण से आप समझें कि खरगोश तो खूब उछलता कूदता है, लेकिन उसकी आयु बहुत कम 2 से तीन महीने, ज्यादा से ज्यादा 6 महीने की होती है। लेकिन कुछआ 300 से 400 साल जीता है। कछुआ धीरे धीरे चलता है, धीमी गति से सांस लेता है। इस तरह वह ऑक्सीजन ज्यादा लेता है और खपत कम करता है। आसन में ठहरना एक बहुत बड़ी कला है। इससे ऑक्सीजन ज्यादा मात्रा में शरीर के अंगाों के पास पहुंचता है। शरीर का कोई अंग बीमार होगा तो वो ठीक होने लगेगा। प्राण वहां झंकृत होने लगेंगे। साथ ही मन भी शांत होगा। शरीर में एक मजबूती आएगी। यह हर तरह से फायदेमंद है। ऋषि-मुनियों ने इसे आजमाया है और यहीं योगगुरु धीरज का संदेश है     
 

ऑक्सीजन , प्राण और एक्सरसाइज़ में चूक का पूरा विज्ञान योगगुरु धीरज से सीधे सुनें 

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नमस्ते ऊँ 
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