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आदित्यस्य नमस्कारं ये कुर्वन्ति दिने दिने । आयु: प्रज्ञा बलं वीर्यं तेजस्तेषां च जायते

नियमित सूर्यनमस्कार करने से आयु, प्रज्ञा, बल और वीर्य(तेज) में विकास होता है

योग की प्रणाली में सूर्यनमस्कार सबसे प्रसिद्ध अभ्यासों में से एक है। अपने चमत्कारिक शारीरिक-मानसिक लाभों की वजह से सूर्यनमस्कार सभी का प्यारा बना हुआ है। हालिया कई रिसर्च से भी ये बात जगजाहिर हो चुकी है कि सूर्यनमस्कार के कई शीरीरिक-मानसिक और आध्यात्मिक लाभ हैं। बिना सूर्यनमस्कार के योग अभ्यास को अधूरा ही कहा जा सकता है। यहां तक कि कई महान योगसाधकों ने सूर्यनमस्कार को अपने आप में पूरी प्रैक्टिस तक बताया है। दरअसल, योग अभ्यास की बुनियाद है सूर्यनमस्कार। शरीर, सांसों और मन के तालमेल से किया जाने वाला ये अभ्यास अपने आप में चलित ध्यान है।
समय दर समय सूर्यनमस्कार के कई प्रकार विकसित हुए, हालांकि उनमे से कई आपस में बहुत हद तक एकतरह के हैं। सांसों और आसनों की गति में तालमेल सभी प्रकार के सूर्यनमस्कार की ख़ासियत है। यहां हम आपको हठयोग और अष्टांग विन्यास योग की सबसे प्रसिद्ध तीन अलग-अलग प्रकार के सूर्यनमस्कारों से परिचित करा रहें हैं।

इन तीनों तरह के सूर्यनमस्कार को समझने में नीचे बताएं गएं 9 आसन बहुत उपयोगी हैं :

ताड़ासन

उर्ध्व हस्तोत्तानासन

उत्तानासन

अंजनी आसन

दंडासन

चतुरंग दंडासन

उर्ध्वमुख श्वानासन

अधोमुख श्वानासन

वीरभद्रासन प्रकार एक

सूर्यनमस्कार हठयोग परंपरा

हठयोग सूर्यनमस्कार अब तक के ज्ञात सभी सूर्यनमस्कारों में सबसे प्रसिद्ध और आसानी से सीखने जैसा है। 8 अलग-अलग आसनों से युक्त हठयोग सूर्यनमस्कार स्पाइन को 12 अलग-अलग गति प्रदान करता है।
surya namaskar

देखें और सीखें- हठयोग सूर्यनमस्कार

सूर्यनमस्कार-ए : अष्टांग यो सूर्यनमस्कार परंपरा

सांस और गति के तालमेल का विज्ञान है सूर्यनमस्कार। अष्टांग विन्यास परंपरा में दो तरह के सूर्यनमस्कार हैं। पहले सूर्यनमस्कार में 9 अलग-अलग विन्यास गति है।
final Surya Namaskar A

देखें और सीखें- अष्टांग योग सूर्यनमस्कार प्रकार एक

सूर्यनमस्कार-बी: अष्टांग योग सूर्यनमस्कार परंपरा

दूसरे प्रकार से अष्टांग सूर्यनमस्कार में 17 विन्यास गति है। अपने आप में शारीरिक और प्राणिक चुनौती वाले इस सूर्यनमस्कार को पश्चिमी देशों में पावर योग सूर्यनमस्कार से भी जाना जाता है। ऐसे में आपको सलाह है कि सूर्यनमस्कार करते वक्त धीरे-धीरे एक आसन से दूसरे आसन में जाएं और सांसों की गति को संतुलित रखते हुए मूवमेंट के साथ तालमेल बैठाएं। final Surya Namaskar B

देखें और सीखें- अष्टांग योग सूर्यनमस्कार– दूसरा प्रकार

आप शुरुआत हठयोग सूर्यनमस्कार से करें। अलग-अलग आसनों को समझें और उनके संबंधित वीडियो को देखें और अभ्यास में लाएं। धीरे-धीरे लगातार अभ्यास से ना सिर्फ आपकी शारीरिक-मानसिक बल्कि आंतरिक तेज़ का भी विकास होगा।

                                              हठयोग सूर्यनमस्कार सही एवं सटीक  तरीका 

आएँ, सूर्यनमस्कार की साधना करें
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