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कहते हैं कि निर्वाण(बुद्धत्व या ज्ञान) प्राप्ति के बाद बुद्ध सात दिनों तक इस चिंतन में रहे कि जो उन्होंने पाया है उसे शेयर किया जाए या नहीं ? जो आनंद की झरना उनके अंदर झर रही थी, क्या उस आनंद की प्राप्ति का रास्ता दूसरे को बताया जाए या नहीं ? बुद्ध को लगा कि जैसे उन्होंने अपना मार्ग ख़ुद पा लिया दूसरे भी पा लेंगे। नाहक दूसरे को बिना पूछे रास्ता क्या बतलाना ? आख़िर में ये भी ख़्याल आया कि उन्हें इस प्राप्ति में छह साल लग गए और सही मार्गदर्शन की कमी में भटकाव अलग से हुआ। ऐसे में बुद्ध ने तय किया कि अपने अनुभव और आनंद की अपनी संपदा को ज़रुर बांटा जाए ताकि दूसरे राहगीर कहीं भटक ना जाएं और प्रेरणा पाकर वो अपनी मंजिल ख़ुद पा सकें। 
वशिष्ठ योग का मक़सद भी यही रहा है कि योग की वास्तविक शिक्षा लगातार दूसरों तक पहुंचायी जाए। चाहे वो समाज के किसी वर्ग का हो या किसी भी आर्थिक हैसियत का व्यक्ति। ऐसे में हम जेल की कैदियों से लेकर अंधें बच्चों तक, सरकारी संस्थानों से लेकर अनाथालयों तक और कम्युनिटी से लेकर कॉरपोरेट घरानों तक योग को पहुंचाने के दिव्य कार्य में लगें हैं। स्त्री, बच्चे, बूढ़े, जवान या कोई रोगग्रस्त हर किसी को वशिष्ठ योग अपनी क्षमता से योग के जरिए मदद करने की हर मुमकिन कोशिश करता आ रहा है। इस आलेख में हम साल 2016 के अपने सात ख़ास योग वर्कशॉप को आपके सामने रख रहें हैं, जो नए साल में आपको योग और ख़ुद से जुड़ने के लिए प्रेरित करें-
  1. विश्व योग दिवस – 3 दिन फ्री योग वर्कशॉप     
    3 दिन चैरिटी योग वर्कशॉप, बरसाना, अहमदाबाद

    वशिष्ठ योग के लिए विश्व योग दिवस महज एक दिन की रस्म अदायगी नहीं है। ऐसे में हम इस मौक़े पे हर साल तीन से पांच दिन का फ्री योग वर्कशॉप का आयोजन करते हैं। इन दिनों में हम योग आसन, प्राणायाम और रिलेक्शन के बेसिक सूत्र लोगों को बताते हैं और प्रेरित करते हैं कि वो योग से जुड़े, जो जीवन से जुड़ने की पूंजी है।

     
     2. थाइलैंड में गुरुजी के जरिए योग ज्ञान 
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    थाइलैंड के अपने निजी तेरह दिनों के योग दौरे पे योगगुरु धीरज के जरिए टीचर ट्रैनिंग से लेकर अष्टांग योग आर्म बैलेंस वर्कशॉप और योग बैकबेंड वर्कशॉप का आयोजन हुआ। थाइलैंड के हर सेक्टर में महिलाएँ पुरुषों से कहीं आगे बढ़कर हैं। दरअसल वहां की अर्थव्यव्स्था की वो नींव हैं। उनका हर दिन काफी व्यस्तता भरा रहता है, बावजूद हर वर्कशॉप में महिलाओं की संख्या 98 फ़ीसदी तक थी और पुरुष महज 2 फ़ीसदी। ये उन सभी के लिए प्रेरणा की बात है जो वक्त का रोना रोते रहते हैं लेकिन जीवन की बेहतरी के लिए, खुद की शांति और आध्यात्मिक विकास के लिए उनके पास टाइम नहीं होता।
    थाइलैंड में योग टीचर ट्रैनिंग के अंश देखने के लिए यहां क्लिक करें   

    3.ऋषिकेश में योगऋषि- चीन के स्टूडेंट की योग पाठशाला 
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    चीनी की करीब 25 महिलाओं का एक दल भारत की आध्यात्मिक नगरी ऋषिकेश आता है। महज सैर-सपाटा उनका मक़सद नहीं। पहली चीज़ जो उन्हें नज़र आती है वो है गंगा की इस पावन नगरी में योग के जरिए आध्यात्मिक विकास। योगगुरु धीरज इस योग आमंत्रण में ऋषिकेश पहुंचते हैं और योग के कई आयामों से उन्हें अवगत कराते हैं। हर दिन योग अभ्यास, योग की चर्चा, कैसे योग दर्शन एक जीवन दर्शन है, इसपे मंथन। हमारे साथ कई ऐसे योग अभ्यासी जुड़े हैं जो अक्सर सैर-सपाटे या काम के लिए विदेश दौरे पे जाते हैं। ज्यादातर लोग वहां योग को भूल ही जाते हैं। क्या विदेश में खुद को रिलैक्स और नया करने वाले योग के लिए महज आधा-एक घंटे निकालना मुश्किल है ?  क्या ऐसे लोग इन चीनी महिलाओं से प्रेरणा लेंगे कि देश हो या विदेश जीवन के प्रति धन्यवाद दिखाने के लिए वो आधा घंटा ही सही आध्यात्मिक तल पे जुड़ने की कोशिश करेंगे।
     चीन के स्टूडेंट के जरिए संस्कृत मंत्र चांटिंग सुनने के लिए यहां क्लिक करें  

      4. वशिष्ठ योग सेंटर में जर्मन स्टूडेंट 
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    एक ऐसा स्टूडेंट का दल जर्मनी से अहमदाबाद आता है। एजूकेशिनल ट्रीप में आया ये दल योग को लेकर भी उतना ही उत्सुक रहा। उनमें कई लोग पहले से योग करते रहे हैं, फिर भी वो योग की बारीकियों और प्रैक्टिस करने के सही तरीक़ों को समझना चाहते थे। कभी-कभी हमें ऐसा लगता है कि विदेश के लोग जितना योग में उत्सुक हो भारत की ओर निहार रहें हैं, वहीं हममें से ज्यादातर लोग बस इस मुगालते में जीते हैं कि योग तो हमारा है और हमको सबकुछ आता है। आएं दिन पार्क और कई संस्थाानों में योग अभ्यास को देखता हूं तो लगता है कि ये हम योग के नाम पे महज खिलवाड़ ही कर रहें हैं। योग सिर्फ शरीर को जैसे-तैसे मरोड़ने का कसरत नहीं, बल्कि सजगता की साधना है, जो नियमित और कुशलता से अभ्यास कर ही हासिल की जा सकती है। प्ररेणा यहीं है कि योग हमारा है तो हमारी जिम्मेदारी और बढ़ जाती है कि इसके पीछे के विज्ञान, कला और आध्यात्मिक चेतना को ऊंचा उठाने के सूत्रों को बारीकी से और ज्यादा समझे और साझा करें। 

     5. अंधे बच्चों को योग की आंखें     

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    पांच दिनों का वर्कशॉप अहमदाबाद के एक ब्लाइंड बच्चों के सेंटर पे। भले ही इनको आंखें नहीं है, लेकिन इनकी सजगता की आपको तारीफ़ करनी होगी। आए दिन हम योग क्लास में अभ्यास को लेकर इंस्ट्रक्शन देते हैं, आंख वाले हमलोग कई बार सुनकर और देखकर भी अभ्यास में गलतियां ही करते हैं। ये बच्चे काफी सजग थे, शायद ना देखपाना ही उनकी गहरी सजगता का मंत्र है। इन बच्चों के साथ माइंडफुलनेस या सजगता की प्ररेणा हमारे अंदर सहजता से आती है। 

    6. विश्व महिला दिवस पे योग : योग लाइफ लाइन 
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    विश्व महिला दिवस में वशिष्ठ योग का फ्री वर्कशॉप। महिला सशक्तिकरण की बात उनके अंदर आत्मविश्वास और जागरुकता से ही पैदा की जा सकती है। व्यक्तित्व में विकास ही महिला सशक्तिकरण की बड़ी कोशिश हो सकती है। योग ना सिर्फ हमें शारीरिक और मानसिक तौर पे फिट करता है, बल्कि हमारे व्यक्तित्व में जबर्दस्त निखार लाने का सामर्थ्य भी रखता है। रिसर्च का मानना है कि महिलाओं में पुरुषों की तुलना में हार्मोन का बदलाव प्राकृतिक रुप से कई गुणा ज्यादा होता है, ऐसे में योग की प्रैक्टिस उन्हें पुरुषों से कहीं ज्यादा ज़रुरी है। आप भी अपने घर और आस-पास मां-बहनों को योग के लिए प्रेरित करें और खुद प्रेरित रहें।
    महिला दिवस पे महिलाओं का पॉवर योग प्रदर्शनी के विडियो को यहां क्लिक कर देखें  

     7. क़ैदियों को योग का मुक्ति संदेश 
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फिल्मों में अक्सर हम कैदियों को भारी-भरकम पत्थर तो़ड़ते देखते आएँ हैं, लेकिन जेल एक सुधार की प्रक्रिया का हिस्सा हो, ना कि खूंखार बनाने का अड्डा। कम्प्यूटर और दूसरी शिक्षा के साथ योग को कैदियों के बीच पहुंचाना सुधार की दिशा में बेहतरीन क़दम है। वशिष्ठ योग लगातार कई जेलों में कैदियों के बीच फ्री योग प्रशिक्षण का काम नियमित कर रहा है। हर अपराध के पीछे नकारत्मकता है और ये सभी जानते हैं कि योग हमारे अंदर सकारात्मक ऊर्जा को एक्टिव करता है। प्ररेणा ये है कि योग जैसे क्रांतिकारी टूल्स को सही मायने में हर तल में लागू करने की जरुरत है। हम योग को जितना अपनाएंगे, हमारे समाज की ऊर्जा सकारात्मक होगी और निश्चित तौर पे अपराध का ग्राफ गिरेगा। 
अब अपने मोबाइल या कम्प्यूटर को छोड़ें, गर्दन ऊपर करें और लंबी सांसों के साथ योग की शुरुआत करें 
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. . . . Continued
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