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पुराने भारतीय मिथकों में कई श्रृषियों-मुनियों की लंबी आयु के बारे में बताया गया है, हालांकि इसके कोई ठोस प्रमाण नहीं दिए जा सके। आज हम चीन के एक ऐसे शख्स की बात कर रहे हैं  जो 256 साल तक जिंदा रहा। 1933 में न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित एक चीनी इतिहासकार के शोध के मुताबिक़ चीन के इस शख्स ली चिंग यून ने 6 मई 1933 को अपनी मृत्यु के वक्त 256 साल का जीवन व्यतीत किया था। चीनी इतिहासकार को एक सरकारी दस्तावेज़ हासिल हुआ था जिसमें साल 1827 में इस शख्स के 150 साल पूरे हो जाने पे बधाई दी गई थी। 1877 के प्राप्त कई दूसरे दस्तावेज़ों से ली चिंग के 200 साल पूरे होने के प्रमाण मिले हैं। 1928 में, न्यूयॉर्क टाइम्स का एक रिपोर्टर लिखता है कि”ली चिंग के कई पड़ोसी बुजुर्ग व्यक्तियों का कहना था कि उनके दादा जब बहुत छोटे थे तब से ली चिंग को जानते थे और उस वक्त वो उनसे काफी उम्र में बड़े थे।” 
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इस शख्स की लंबी उम्र का राज  

माना जाता है कि जब खुद ली चिंग से उनकी लंबी उम्र के रहस्य के बार में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि, “शांत रहो, कछुए की रह बैठो, कबूतर की तरह चलो और एक कुत्ते की तरह नींद लो।” ली के कहने का मायने था कि मन की शांति , कछुए की तरह स्थिरता, कबूतर की तरह हर वक्त एक्टिव रहना और कुत्ते की तरह किसी भी स्थिति में रिलैक्स हो सो जाना हमारी उम्र पे असर डालता है। कहा जाता है कि ली चिंग ज्यादातर औषधि से संबंधित डाइट पे रहते थे और वो मार्शल आर्ट के जानकार थे। ली चिंग ने मन की शांति और ब्रीदिंग टेक्नीक के मूलमंत्र से एक लंबी उम्र हासिल की थी। उनकी खाश हर्बल डाइट ने लंबी उम्र में भारी योगदान दिया, लेकिन हमें ख़्याल रहे कि इतिहास में जितने भी लोगों के लंबी आयु होने के प्रमाण हैं, उनकी मन की शांति सबसे अहम बात को तौर पे सामने आई   

इसको मान लेना आज इतना कठिन क्यों ?  

आज जब औसत आयु 75-80 के उम्र पे आकर ठहर गई है वहां लंबी आयु की बात को पचा पाना काफी कठिन है। 100 साल पूरे हो जाने पे भी हम आज हैरानी जताते हैं, तो 200 साल से ज़्यादा उम्र की बात हम कैसे मान सकते हैं ? हमें नहीं भूलना चाहिए कि उस जमाने के व्यक्ति हमारी तरह तनाव भरे वातावरण में नहीं जीते थे। वो प्रदूषित हवा को नहीं पी रहे थे , ना तो रिफाइन्ड चीनी और ना ही पेस्टीसाइड फूड का सेवन कर रहे थे। वो उन तमाम फास्डफूड की संस्कृति से दूर थे जिसने आज घर घर अपने डेरा बना रखा है। उनके जमाने में कोई जेनेटिक्ली मोडिफाइड अनाज ना था, ना ही वो फैटी मीट, तंबाकू या एल्कोहल के चपेट में थे। वो दरअसल हर्ब्स युक्त सूपरफूड का इस्तेमाल करते थे, जो उनके अंगों और इम्युनिटि के लिए स्टेरॉइड के तरह काम करते थे। वो नेचर के साथ जीते थे और अपना वक्त ब्रीदिंग टेक्नीक और ध्यान में लगाते थे, जो आज भी शारीरिक-मानसिक और इमोशनल हेल्थ के लिए बेहतरीन माने जा रहें हैं। वो चीजों को सिम्पल रखते थे, बेहतर नींद लेते और सूर्य की रोशनी से ऊर्जा  

जाने किस प्राणायाम से क्या है फ़ायदा, साथ में विडियो 

हमें शक नहीं होना चाहिए कि जो फैक्ट हम जानते है उसके मुताबिक जीने लगे तो भला कम से कम 100 साल बेहतरीन जीवन की संभावना को कौन टाल सकता है ?   
वशिष्ठ योग की ओर से शतायु होने की शुभकामानाएं !  
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  1. November 18, 2017

    I intend to join yoga for one month.

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