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सूर्यनमस्कार एक प्रसिद्ध और अपनें-आप में पूरा सिक्वेंस है। जिसे योग का राजा कहते है। सूर्यनमस्का बिना अभ्यास के योग प्रैक्टिस को अधूरा माना जाता है।  ऐसा कहा जाता है कि, सिर्फ सूर्यनमस्कार के अभ्यास से पूरे योग प्रैक्टिस हो जाने के बराबर है। अपने चमत्कारिक शारीरिक-मानसिक लाभों की वजह से सूर्यनमस्कार सभी का प्यारा बना हुआ है। सूर्यनमस्कार को 12 चरणों में किया जाता है, जिसमें सिर्फ 8 आसनों की भूमिका, एवं शरीर, मन और सांसों के तालमेल से बना है । वर्तमान समय में सूर्यनमस्कार में कई तरह के गलत अभ्यास करते लोग दिखते हैं, जिसकी  वजह से बिल्कुल भी लाभ नहीं मिलता ।हठयोग सूर्यनमस्कार में हर आसन सही होना जरुरी है, इससे लाभ जल्दी और 100 प्रतिशत हासिल होगा। इसलिए वशिष्ठ योग आश्रम के योगगुरु धीरज जी बता रहे हैं । कैसे करें सूर्यनमस्कार का पूरा सही तरीका, सांसें , मंत्र और ध्यानात्मक प्राचीन विधि इसके अभ्यास का। ।
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