Lord-Shiva
सावन की शुरुआत के साथ शिव को लेकर कई सारे तथाकथित धार्मिक-आध्यात्मिक लेखों और स्टोरी से वेबसाइट, न्यूज़ पेपर और न्यूज़ चैनल के स्लॉट भरे पड़े हैं। कोई बता रहा हैं कि किस तरह के पूजन से होंगे शिव प्रसन्न ? कोई बखान कर रहा है क्या-क्या सावधानी बरते पूजन में, ताकि नाराज़ नो हो भोलेनाथ ? टीवी पे पुरोहित-पंडित आके पूरे विधि-विधान से शिव को खुश करने के सूत्र बता रहें हैं। कहीं थर्ड आई वाले बाबा टीवी पे शिव की तरह अपनी कृपा बरसाने वाले शो में बिजी हैं। नहीं, इन सबसे कुछ नहीं होगा। हां, कुछ लोगों का व्यवसाय ज़रुर चल जाएगा। इन कर्मकांडों से सही मायने में कुछ भी रुपांतरित नहीं होगा, इन झूठे छलावों से जीवन की बगिया में फूले नहीं खिलेंगे। सिर्फ दूध-पानी चढ़ाके रेगिस्तान हो चुकी खुद की दुनिया में शिवकृपा की बारिश नहीं होगी। शिव के पूजन में खुद के अर्पण के अलावा कोई दूसरा उपाय नहीं 
पुरोहित बस छोटे-छोटे उपाय बता हमारे मन को बहलाएंगे, लेकिन इन उपायों से शिव खुश नहीं होने वाले, क्योंकि शिव कोई पुरोहित नहीं। वो ऐसे नहीं जो छोटी-बड़ी बातों से नाराज़ और खुश हो जाते हैं। शिव का पूजन शिव को समझें बगैर नहीं हो सकता। हमनें शिव को नहीं समझा है। भोलेनाथ हमारे विकलांग हो चुकी समझ से कोसो दूर हो चुके हैं। 112 ध्यान की विधि बताने वाली ‘विज्ञान भैरव तंत्र’ हो या ‘शिव सूत्र’ हर जगह साधना को ही हमारे अंदर के रुपांतरण का आधार बताया गया है। कर्मकांड बस एक बाहरी सफाई भर है, अंदर की सफाई तो शिव के बताएं साधना के सूत्रों से ही मुमकिन है 
आप शिव का ख्याल करें तो किस तरह की तस्वीर आपके जेहन में आती हैं ? हमारी आंखों में शिव का योगी स्वरुप सामने होता है। रीढ़ की हड्डी सीधी कर ध्यान में बैठा कैलाश नज़र आता है। क्या हमारे मानस पटल पे बन रही ये तस्वीर हमें कुछ नहीं सीखाती ? क्या ये हमें नहीं कहती कि आडंबर नहीं बल्कि सतत जागरण से होगा शिव पूजन ?  शिव का ये योग स्वरुप हमें साधना की गहराई में उतारने की जगह, कर्मकांडों की ऊपरी प्रक्रिया में क्यों लटकाएं रखी हुई हैं ?  दरअसल, हमें धोखें में रहने की आदत-सी हो गई है। हम सोचते हैं कि बेलपत्त, दूध चढ़ा आएं और हो गया काम। नहीं, चालाकियों से भरा ये मन ऐसे शुद्ध नहीं होगा। भोलेनाथ की साधना में मन का भोलापन ही कसौटी है
शिव एक अवतार हैं, द्रस्टा हैं, वो चेतना की परम ऊंचाई हैं। वो दिव्य जागरण के प्रतीक पुरुष हैं। शिव की सारी साधना रुपांतरण का विज्ञान है, और विज्ञान का एक ही नियम है कि तय रास्तों से ही गुजरना होगा, वहां कोई शॉर्ट-कट नहीं है, वहां कोई चालाकियां काम नहीं आएंगी। शिव एक आग हैं, उसमें जलने की तैयारी हो तभी हमारे अंदर नए का जन्म होगा, दिव्यता का जागरण होगा 

शिव के निचे दिए कुछ थोड़े सूत्रों को समझें और इस समझ को गहरे उतरने दें और फिर जो जागरण आपके अंदर घटित होगा, उसी से होंगे प्रसन्न देवों के देव महादेव : 

चैतन्यमात्मा

ज्ञानं बन्ध:

योनिवर्ग: कलाशरीरम् 

उद्यमो भैरव:

शक्तिचक्रसंधाने विश्वसंहार:                     ( शिव-सूत्र से साभार )

भावार्थ : शिव कहते हैं कि इस जगत में तुम्हारा चैतन्य यानी जागरण ही बस तुम्हारा अपना है, बाकी सारी जानकारी या ज्ञान बंधन का कारण है। इस योनि में प्राप्त शरीर के जरिए उद्यम यानि आध्यात्मिक साधना करें, क्योंकि ये आध्यात्मिक साधना ही भैरव यानी शिव होने की कुंजी है । जब हम ठीक आध्यात्मिक साधना कर पाते हैं तो शक्ति का चक्र अपनी पूर्णता को प्राप्त होता है और संसाररुपी बंधन का संहार यानी नाश होता है 
शिव के ये अनमोल वचन गहरे उतरने दें। शिव का साफ-साफ इशारा हैं कि ये थोथी जानकारी या कर्मकांड सिर्फ बंधन पैदा करने के अलावा और कुछ नहीं करते। भैरव के पूजन के लिए आध्यात्मिक साधना के अलावा शिव कोई दूसरा उपाय यहां नहीं बता रहें हैं। साधना से मन का अंत होगा और हम चैतन्य के अपने स्वरुप से मिल पाएंगे और उसी दिन हमारे अंदर भैरव का जागरण होगा, शिव प्रसन्न होंगे 

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जय शिवयोगी 
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