Started Vashistha Yoga
न्यूज़ रुम की चमकती लाइट, जो दिन-सा आभास दें, हर तरफ फैली हुई थी। रात्रि के आखिरी प्रहर में की-बोर्ड की “कट-कट, कट-कट” चलने की आवाज़ आ रही थी। हर तरफ नींद को जीत लेने वाले गुडाकेश खबरों की पैकेजिंग में व्यस्त नज़र आ रहे थे । न्यूज़ रुम के अंडाकार एरिया में, मैं सुबह के बुलेटिन की रनडाउन ( न्यूज़ बुलेटिन को क्रम देने की व्यवस्था ) को लेकर सोचनीय मुद्रा में था। इस मुद्रा में कई  विचार आ-जा रहे थे। नाइट शिफ्ट मेरा पसंदीदा ना था, लेकिन इसबार मैंने खुद रात्रि कार्य की पैरवी की थी। रनडाउन प्रोड्यूसर को दिन में भागती-हांफती खबरों की तुलना में रात्रि में सुकून रहता है। सुकून और समय कब सोच में डूबो लेती है पता नहीं चलता। रह-रह कर एक सोच जैसे खुद को झकझोरे जा रही थी। जीवन की ओर इशारे किए जा रही थी- देख लो, जॉब हो जाएगा, घर चले जाना, सो जाना, फिर उठकर टीवी पर न्यूज़ देख अपडेट हो लेना आखिर में दौड़ा-दौड़ा ऑफिस वापस आ जाना। हर दिन जैसे एक रुटीन बन गई थी जिंदगी। जिंदगी कम, जॉब ज्यादा थी।  मीडिया के इस कार्य में बहुत रस था, लेकिन ज़िंदगी नीरस जान पड़ रही थी। न्यूज़ इंडस्ट्री में सबकुछ था, लेकिन जीवन अपनी त्वरा में जैसे प्रकट नहीं हो रही थी। नियति जैसे कहीं ओर ले जाना चाहती थी। हमेशा की तरह मैंने कभी जीवन में क्या करना है,  प्लान ना किया था, बस बहने को राजी था, राजी हूं । उस दिन भी नियति की इस पुकार को अनसुना ना कर सका , मन में फैसला ले लिया और न्यूज़ चैनल को जल्द अलविदा कहने की तारीख़ तय हो गई 
 
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न्यूज 24 की रात्रि शिफ्ट में साथियों के साथ। न्यूज़ 24 में कार्य के बाद मीडिया की नौकरी को अलविदा कह दिया

 

नियति अटल, मैं बहता रहा 

ग्रेजुएशन से पहले पत्रकारिता का सोचा नहीं था, लेकिन दिल्ली के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान का एड अख़बार में आया और आगे मैं लिखित एग्जाम में बैठ गया। फिर ग्रुप डिस्कशन, इंटरव्यू होते-होते पूरे भारत के 25 स्टूडेंट में एक के रुप में मेरा चयन हो गया । 4 साल के राष्ट्रीय चैनल के केरियर में 2 चैनलों के लॉन्चिंग के वक्त का अनुभव लिया। फिर वक्त की आंखों में खुद को निहारा तो  एक योग स्टूडियो में पाया। बेसिक क्लास का ये कोर्स सप्ताह में 3 दिवस का था। घर में रहता तो लगता कुछ और भी अंदर की पुकार है जिसे समझ नहीं पा रहा था। इस पुकार ने मुझे एक दिन – योग वशिष्ठ – ग्रंथ की तरफ मोड़ लिया था। पढ़ना शुरु किया तो लगा जीवन में कितना कुछ जीने जैसा है , जिसे छोड़ भटकता रहा। हर दिन दो चीजें साथ-साथ चल रही थी-  साधना और योग वशिष्ठ का स्वाध्याय । आगे मानो स्वयं गुरु वशिष्ठ जैसे साक्षात दिव्य ज्ञान को खोल रहें थे, मैं भाव-भिवोर था, प्रस्तुत था। एक ओर जहां,  प्राचीन सनातन ज्ञान दिव्यता की अनुभूति करा रही थी, दूसरी ओर साफ-साफ दिख रहा था कि योग स्टूडियो, योग के मठाधीश कैसे योग के नाम पर महज कचरा ही परोस रहें हैं। तन-मन-प्राण में अमृत घोलने वाले योग के चारों ओर दुकानें सजी-संवरी थी। गंगा की तरह निष्पाप करने वाला योग, गंगोत्री से निकल कर गंगा सागर तक एक लंबी यात्रा तय की थी , लेकिन इस बीच गंदगी काफी जमा होती चली गई। योग के नाम पर दुकान और दावों का मायाजाल बुना जा चुका था। सब कुछ देख एक प्रश्न बार-बार उठ खड़ा हो रहा था- कहीं योग का तंत्र जैसा तो हाल नहीं हो जाएगा ? तंत्र जैसी परम चैतन्यता की साधना मक्कारों के हाथ में पड़ पतित हुई , गंदगी से सनी और फिर तिनका-तिनका बिखर गया। तंत्र संदेहास्पद बना और तांत्रिक गाली। क्या योग की अविरल धारा गंदगी से सराबोर अपनी दिव्य ध्येय से चूक जाएगी ? ऐसे अनगिनत सवाल अब साथ-साथ चल रहे थे। एक दिन जवाब आया। गीता को हर दिन रात्रि में सोने से पहले 5 श्लोक पढ़ लिया करता था। उस दिन के श्लोक में श्रीकृष्ण स्वयं मेरे सवाल का जवाब देने मानो सामने थे  
एवं परम्पराप्राप्तमिमं राजर्षयो विदुः 
स कालेनेह महता योगो नष्टः परन्तप  –  गीता 4.2  
हे परन्तप अर्जुन! इस प्रकार परम्परा से प्राप्त इस योग को राजर्षियों ने जाना, किन्तु बहुत काल बीतने के बाद वह योग- परम्परा (पृथ्वी से) लुप्त हो गयी  
स एवायं मया तेऽद्य योगः प्रोक्तः पुरातनः  
भक्तोऽसि मे सखा चेति रहस्यं ह्येतदुत्तमम् – गीता 4.3   
 वही यह पुरातन योग आज मैंने तुमसे कहा है क्योंकि तुम मेरे भक्त और प्रिय सखा हो। यह बड़ा ही उत्तम रहस्य है  
 
  संदेश साफ था ये सनातन पुरातन योग कई काल से रहा , विलुप्त होता रहा है और फिर कहा गया। मानो नियति मुझे फिर से कहने को प्रेरित कर रही थी। भीतर से आत्मतत्व की पुकार आई कि – मेरी योग साधना महज मेरे आत्म कल्याण तक सीमित नहीं हो सकती। मेरा रुपांतरण बस अंतिम ध्येय नहीं हो सकता। दिव्य शक्तियां और योग ऋषि इशारों में आदेश दे रहें थे और नियति मुझे साथ लिए आगे बढ़ने को तत्पर थी। महर्षि वशिष्ठ को गुरु मानते हुए वशिष्ठ योग की स्थापना का शुभ विचार मन में बीज बन उभरने लगा । 4 जुलाई, 2011 को औपचारिक तौर पर एक चैरिटेबल ट्रस्ट के तौर पर वशिष्ठ योग फॉण्डेशन ट्रस्ट की स्थापना हो गई। गुरु के नाम और उनको सबकुछ समर्पित करता हुआ वशिष्ठ योग सनातन प्राचीन योग के पुर्नस्थापना के साथ जीवन को उत्सव व आंदोलित करने को तैयार उठ खड़ा हुआ 
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Google फोटो ने 10 साल पहले की इस तस्वीर की याद दिलाई. दिल्ली में एक योग कार्यशाला, तब वशिष्ठ योग ट्रस्ट की स्थापना भी नहीं हुई थी 
 

अहमदाबाद बना योग केंद्र अभियान 

वशिष्ठ योग चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की भूमि बिहार तय हुई। वही बिहार जहां बुद्ध ने फिर से साधना के नए सोपान को तैयार किया था, जहां से निकल महावीर का कैवल्य ज्ञान दशो दिशाओं में फैल रहा था, जिस भूमि पर स्वयं गुरु गोविंद का जन्म हुआ, उसी बिहार में योग के दिव्य ध्येय को लेकर एक नई नींब डाली जा रही थी। बिहार में जब ट्रस्ट की नींब रखी गई थी, उस वक्त तक मैं गुजरात के अहमदाबाद में रहने लगा था। अहमदाबाद भी आना नियति की लीला थी, कभी प्लान ना था। जीवन में कई चीजें घटित हो रही थी और हो रहा है – हर जगह एक चीज जो देख पा रहा था- वो नियति की यात्रा, जिसमें मेरी हामी थी, अपने निर्णय की जिद नहीं। इससे पहले कभी गुजरात जाना नहीं हुआ था। सोमनाथ व द्वारिका जाने की अंदर तड़प हुई और निकल पड़ा था। दिल्ली से अहमदाबाद पहली बार उतरा तो एक सुकून-सा लगा। दिल्ली की भीड़ , दौड़ व शोर के बीच अहमदाबाद शांत, ठहरा-सा जान पड़ा। बस मन को लगा यही रहना है। प्रश्न भी आएं कि दिल्ली में कई परिचित हैं, कई सहयोगी है, मीडिया की मित्र मंडली है- सबको छोड़ एक ऐसे प्रदेश में कैसे बसा जाए जहां कोई परिचित नहीं , अपनी भाषा नहीं , ठिकाना नहीं ? हालांकि मन की कभी सुनी नहीं, इसलिए नियति ने कहा – यहीं केंद्र बना , हर व्यक्ति अपने हैं और तुम सबके हो। नियति की सुन मैं आगे बढ़ गया। अहमदाबाद बस गया।  अहमदाबाद में यात्रा आसान ना थी, लेकिन चलते जाना था । कई सारे वर्कशॉप , शिविर, कार्यक्रम व चिकित्सा के साथ योग कार्य सालों तक चलता रहा। फिर एक दिन कानों में नियति ने फिर फुसफुसाया   
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2012 – गुजरात पुलिस अकादमी के 500 डीएसपी रैंक व दूसरे अधिकारियों के साथ 3 दिवसीय योग शिविर 

आश्रम निर्माण और राष्ट्रीय आंदोलन

अब तक सारे कार्यक्रम अहमदाबाद ज्यादा केंद्रित रहे। समांतर रुप से बिहार में भी संगठन से जुड़े लोग कुछ-कुछ योग कार्य कर रहे थे। शुरुआत में वशिष्ठ योग के अंग्रजी चैनल के जरिए भी योग प्रसार का कार्य हुआ, लेकिन शीघ्र लगने लगा कि यूट्यूब पर भी बहुत गंध मची हुई है। योग के नाम पर दावों और मूर्ख बनाने की होड़ लगी है। भोली भाली भारतीय जनमानस को बस ठगा-सा जा रहा है। कोई तकिए से कमर के बिगड़े डिस्क को ठीक करवाने का दावा कर रहा था तो कोई 99 फीसदी बीमारी को कपालभाति क्रिया से दूर करवाने के बड़बोलेपन के साथ था। कभी लगा कि लोगों के अंदर विचार क्यों नहीं आते कि अगर कपालभाति ही सब कुछ कर दिया होता तो फिर बाकी योग की साधना क्यों विकसित हुई ? सब कुछ शॉर्टकट से ही फिक्स हो गए तो योग को आगे रख कारोबार कैसे करोड़ों का फैल गया ? बस इस चिंता ने शीघ्र राष्ट्रीय योग जन चेतना को जाग्रत करने के आंदोलन के तरफ मुझे प्रेरित किया। अहमदाबाद में एक आश्रम शीघ्र बनाने की योजना हुई जिसको केंद्र बनाकर राष्ट्रीय कार्यक्रम शुरु हो। राष्ट्रीय योग शिक्षक प्रशिक्षण शिविर, राष्ट्रीय योग शिविर, योग यात्रा , योग शिक्षण वेबसाइट, योगगुरु धीरज चैनल की शुरुआत जैसे कई कदम इस दिशा में बढ़ते गएं। आगे योगबली भी इसी प्ररेणा और योग की सनातन संस्कृति को घर-घर , गली-गली पहुंचाने के संकल्प के साथ शुरु हो चुकी है, आप भी जुड़ें – क्लिक करें । योग का ये शंखनाद हो चुका है और शीघ्र 4 जुलाई को दिव्य संकल्प व ध्येय के साथ स्थापित वशिष्ठ योग अपने विराट रुप में प्रकट होने जा रहा है। गुरु वशिष्ठ की शिक्षा धमनियों में रक्त बन दौड़ रही है। संदेश साफ है कि जीवन जब एक दिवस छूट जाएंगी तो व्यर्थ में ऐसी चीजों को क्या गढ़ना जो जीवन के साथ खत्म हो जाती है, क्यों ना ऐसी योग ज्योति जलाएं, जिसकी ज्योत जीवन के साथ और जीवन के बाद भी जन-जन को प्रकाशित करती रहे। बस इस प्ररेणा के साथ योग जीवन प्रकाश की यात्रा जारी है  
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वशिष्ठ योगाश्रम अहमदाबाद में नित्य योगाभ्यास के दौरान ध्यान में साधक
 

क्लिक , कैसे न्यूज़ चैनलों पर छा रहा है वशिष्ठ योग का संदेश  

आप भी इस यात्रा से जुड़ें । साधना करें और संगठन के तल पर जुड़ कार्य का वहन करें, उत्तरदायी बनें और सब मिलकर वशिष्ठ योग के जीवन संजीवनी बनाने के विराट ध्येय को साकार करने पर लग जाएं   
 आभार नमस्ते  

क्लिक – इस लेख को अंग्रजी में पढ़ें  

( ये आलेख योगगुरु धीरज के जरिए लिखित  )  

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. . . . Continued
  1. July 3, 2020

    जय गुरुदेव !! बहुत अच्छा,आप जो जनमानस को स्वस्थ और सही योग की दिशा दिखा रहें हैं,ये योग यात्रा अनवरत चलती रहेगी,आपका हर संकल्प पूरा हो, मेरी ये शुभ कामनाएं हैं , जय हो गुरुदेव !! आभार ।।

  2. July 3, 2020

    बहुत सुंदर लिखा गया है,गुरु जी।आपकी योग यात्रा का परिचय लोगों तक पहुंचे।

  3. July 4, 2020

    Sabhi Vashisht sadako ko sthapna Divas ki bahut bahut badhai Guruji se mera Agra Hai Ki Shalu Sal Tak Hamara margdarshan Karte Rahe

  4. July 4, 2020

    मै हूँ #योगबली।
    सनातन संस्कृति के इस अनमोल धरोहर की पुनर्स्थापना हेतु आपका यह भगीरथ प्रयास अतुलनीय है।इतिहास आपको सदैव याद रखेगा।
    मै भी इस सेतु के निर्माण मे एक गिलहरी की तरह अपना योगदान देता रहूँगा।
    सादर प्रणाम्।

    • July 4, 2020

      आपका प्रेम तो हनुमान की तरह निस्वार्थ है…. फिर वो छोटा कहां बहुत विशाल हो जाता है . आभार नमस्ते

  5. July 4, 2020

    बहुत ही प्रेणादायक है आपकी ये योग यात्रा
    आपके शब्दों से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है मुझे,योग वास्तव में अनुभव का विषय है ,योग को लेकर जो भ्रांतिया फैल रही है उनको दोषो को समाज से आप जैसे गुरु ही नष्ट कर सकते है,
    आपकी इस योग यात्रा का हिस्सा बनकर खुद को सौभाग्य शाली मानती हूं

    • July 4, 2020

      बहुत आभार….. हम सब मिल एक दिव्य ध्येय की ओर जनहित में बढ़ते जाना है नमस्ते

  6. July 4, 2020

    गुरुजी आप ने जो योगबली कि सुरुआत की है बहुत अच्छा है ! इससे बहुत लोगों को फायदा हुआ है ! जिसमे मैं भी एक हु आप ने सही कहा कि जो वास्तविक योग है उसके नाम पर बहुत उल्टा सीधा हो रहा है उसको आप एक नई दिशा के साथ ले के उभरे है सबके बस का नही होता कि एक नौकरी को छोर कर योग की तरफ बढ़ना लेकिन आप ने ऐसा किया !आप समाज को एक सही दिशा दे रहे है कबीले तारीफ है !आप का बहुत बहुत धन्यवाद कल गुरु पूर्णिमा है मै आप को प्रणाम करता हु ! आप जैसा गुरु मुझे मिला मैं भाग्यसली हु !

    • July 4, 2020

      आप सबों का प्रेम मुझे इधर खींच ले आया…….. हम जुड़ें रहें साधनारत रहें नमस्ते

  7. July 4, 2020

    Jai gurudev
    बहुत सुंदर गुरुवार
    App ki journey , app ka message now it has become our. Every time I read and listen to you I get more inspire for the celebration of life.

    • July 4, 2020

      प्रेरित हो जनहित में हमें आपको लगे रहना है ……… जय हो

  8. July 4, 2020

    Guru ji is lekh ko padhkar aapke prati samman aur badh gaya
    Aur aap mere prernasrot bhi hain
    Ham bhi yog ki prachin sanskriti ko jivit banaye rakhne mein sadaiv aapka sath denge

    • July 4, 2020

      आभार हम साथ साथ चलते रहेंगे …. नमस्ते

  9. July 4, 2020

    Yoga guru Dheeraj g ka u tube per pahli Baar dekha or uskey Baad to her ek. vedio dekhti hu bhut he acha ker rhey hai . Hum jo ahemdab nhi ja saktey unkey liye sub key liye ghar per he sub kuch sikha diya vo bhi nesavath bhaav sey apka jitna aabhar Kam hai. Meri Hardik echa hai main bhi apkey aashram sey judu or yoga Ko aagey sub to phuchney mey yogdaan du

    • July 4, 2020

      बहुत आभार…… ये जीवन आप सभी के लिए समर्पित कर चुका हूं….. फिर कुछ बांटने में अब संकोच कहां ……… आप जरुर साथ जुड़ इस यात्रा को सहजता से आगे बढ़ाएं . आश्रम संपर्क में रहें आभार नमस्ते

  10. July 4, 2020

    Adbudh
    Viswasniye
    Prernadayak
    Itna adamay sahas karna
    Or jeevan ko naya roop Dena wo bhi samaj seva K liy,, salute salute

    • July 4, 2020

      आप सभी मेरी प्ररेणा शक्ति हैं …….. फिर सब सहजता से हो जाता है आभार नमस्ते

  11. July 4, 2020

    ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️❣️yoga se hi sab sukhmay hoga

    • July 4, 2020

      बिल्कुल . आभार नमस्ते

  12. July 4, 2020

    Bahut hi sandar tareeke se guruji ne apne vicharo se avgat karaya.behad hi achha laga lekh.
    Yog ko sanatan tareeke se hum sabke samaksh rakhne ke liye guruji ka sukriya.jai ho
    Me hu yogbali
    Ghar ghar gali gali.

    • July 4, 2020

      जय योगबली आभार नमस्ते

  13. July 4, 2020

    Parnam guri ji, thank you for sharing behind the scenes story.

    Aap jis sachaai, dedication and simplicity se iss divya gyan ko samjhaate hain wo apni misaal aap hai.
    Atma ki awaz sun ker yog mein aane ka bohat shukriya.
    Aap ki presence aik ese inspiration hai jo alfaaz mein bayan nahi ki jaa sakti. Aur jis saralta se gyan ko samjhate hain roopantran nishit hai

    Keep inspiring. This world needs more people like you.

    Adi guru Shiv, Shri Krishna aur guru Vashistha ki kripa aap per hamesha rahe.

    Jai Shri Krishna

    • July 4, 2020

      आप बंधुओं के बोल मुझे प्रेरित करते रहें हैं…… आप सबों को पा धन्य महसूस करता हूं………. शुभकामनाओं के लिए तहे दिल से साधुवाद नमस्ते

  14. July 4, 2020

    गुरु ब्रह्मा है, गुरु विष्णु है, गुरु हि शंकर है; गुरु हि साक्षात् परब्रह्म है; उन सद्गुरु को प्रणाम ।

    योग गुरू धीरज जी आप का आलेख बहुत ही प्रेरणादायी है.

    आपने वास्तविक योग का मार्ग दुनिया को दिखाने की जो चुनौती स्वीकार की है, ऊस कार्य नमन करता हु. और हार्दिक शुभ कामना देता हु..

    • July 4, 2020

      हम जैसे बंधु साथ हैं तो हर चुनौती सहज हो जाती है आभार नमस्ते

  15. July 4, 2020

    G evening sir Ji
    Aapka yog krane ka trika or uski full definition bhut achchhi h lgta h jse aap apne samne bitha kr ye sb aasan pranayam or yog kriyae kra rhe h lgta h khchh glt kiya to khege ki dyan kha thik se Karo hr bimari ka solution ke sath define Karna such me imaging h thanks a lot
    Again thanks ak bar aapke aashrm aakr aapka dhnywad bhi krna chahte h

    • July 4, 2020

      आप सभी मेरे साथ ही होते हैं. दूर नहीं कभी …… इसलिए उसी भाव से बांटता चला जाता हूं…….. वशिष्ठ परिवार ऐसा ही है आभार नमस्ते

    • July 4, 2020

      बिलकुल सही कहा आपने..

  16. July 4, 2020

    Wow a amazing life and long journey very good sir ji it’s my pleasure i know about your yog journeys

  17. July 4, 2020

    जी नमस्कार
    मै भारतीय जवसंचार संस्थान की १९९१-९२ मे हिन्दी पत्रकारिता की छात्रा रही हूँ
    आप का लेख पढा

    • July 7, 2020

      नमस्ते . बहुत खुशी हुई जानकर . क्योंकि गुरुजी स्वयं इसी संस्थान से पढ़ें हैं….. आप आश्रम संपर्क करें 6354 32 5086 , आप अपना नंबर भी व्हाट्स एप कर सकती हैं.. आगे गुरुजी से जरुर बात होगी धन्यवाद

  18. August 29, 2020

    बहुत ही प्रेरणादायक है आपका सफर।
    आपका मनोभाव की
    “हर व्यक्ति अपने है और आप सबके”
    यही आपको औरो से भिन्न बनाती है।
    आपके ऊपर परमात्मा की और स्वयं गुरु वशिष्ठ के अनुकंपा है जिससे आपको अनुपम बल मिलता है।

    • October 20, 2020

      बहुत-बहुत आभार आपका ऊँ

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