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जब तुम अपने लिए कुछ मांगते हो तो वो याचना हो जाती है और जब तुम्हारे अंदर सभी के कल्याण की मांग हो तो वो प्रार्थना हो जाती है। प्रभु के द्वार पे बस प्रार्थना ही सुनी जाती है, याचना नहीं।
सभी के कल्याण के लिए वशिष्ठ योग की नित्य प्रार्थना :

योग साधना की शुरुआत में की जाने वाली प्रार्थना: 

ॐ सर्वेशां स्वस्तिर्भवतु
सर्वेशां शान्तिर्भवतु
सर्वेशां पूर्णंभवतु
सर्वेशां मङ्गलंभवतु
लोका: समस्ता: सुखिनो भवन्तु
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
हरि ॐ ! श्री गुरुभ्यो नम: ! हरि ॐ

अर्थ: 

सब का भला हो !
सब को शान्ति मिले !
सभी को पूर्णता हासिल हो !
सब का मंगल हो !
सारे लोक सुखी हों !

योग साधना समाप्ति से पहले की जाने वाली प्रार्थना: 

स्वस्ति: प्रजाभ्यः परिपालयंतां
न्यायेन मार्गेण महीं महीशाः ।
गो ब्राह्मणेभ्यः शुभमस्तु नित्यं
लोकाः समस्ताः सुखिनोभवंतु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः
हरि ॐ ! श्री गुरुभ्यो नम: ! हरि ॐ

अर्थ: 

शक्ति शाली और सत्तातंत्र द्वारा सभी लोगों की भलाई न्यायूपर्वक हो !
ईश्वर सभी विद्वानों और भले लोगों का हर दिन शुभ करें  !
सारे लोक सुखी हों !
जहां प्रेम नहीं, वहां प्रार्थना नहीं हैं
शेयर करें, प्रेम और प्रार्थना    
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. . . . Continued
  1. August 20, 2018

    जय गुरुदेव

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