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  मूलाधार चक्र मानव चक्रों में सबसे पहला है, कुंडलिनी योग हमारे सात चक्र जागरण की साधना है । शरीर में इसका स्थान जननेन्द्रिय और गुदा के बीच  स्थित है । मूलाधार चक्र हमारे व्यक्तित्व में आत्मविश्वास व शक्ति यानी Confidence & Strength बढ़ाता है जिससे मनुष्य एक मजबूत ढ़ाल की तरह स्वाभिमानी और आत्मविश्वासी होता है । इसे जाग्रत करने के लिए आसनों में वीरभद्रासन, अंजनी आसन, मलासन जैसे कई आसन हो सकते हैं। कुंडलिनी चक्र साधना के इस वीडियो में वशिष्ठ योग आश्रम के योगगुरु धीरज बता रहें हैं मूलाधार चक्र का क्या है महत्व और कैसे हम आसन अभ्यास के जरिए इन्हें संतुलित या जाग्रत कर सकते हैं। 
 
नमस्ते ऊँ
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. . . . Continued
  1. September 9, 2020

    Life Changer,, VENUES

  2. September 9, 2020

    Nice।
    ‍♂️‍♂️

  3. September 10, 2020

    बहुत ही अच्छा लगा गुरुजी।

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