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कपालभाति अपने आप में कम्प्लीट प्रैक्टिस नहीं, इसतरह के शॉर्टकर्ट से लोगों को बचना चाहिए : स्वर्गीय योगगुरु अयंगर 
ये बयान है करीब 75 साल से ज़्यादा वक्त तक योग की टीचिंग से पूरे विश्व को सेहत का वरदान देने वाले योगगुरु वी के एस अयंगर का। अयंगर इस बात से हैरान थे कि कुछ योग संस्था कपालभाति को बहुत बढ़ा-चढ़ा के पेश कर रहीं हैं और ग़लत तरीके से इसको योग के एक शॉर्टकर्ट के रुप में पेश किया जा रहा है। अपने चीन दौरे के वक्त अयंगर ने बिना बाबा रामदेव का नाम लिए कहा था कि “ऐसे योग शिक्षक या गुरु पतंजलि के प्राचीन योग सिस्टम को बस नुक़सान ही पहुंचा रहे हैं”  

कपालभाति प्राणायाम का सच   

कपालभाति की चर्चा हठयोग प्रदीपिका जैसे यौगिक पुस्तक में सबसे पहले विधिवत जानने को मिली। हठयोग के छह षट्कर्म (यौगिक सफाई) क्रियाओं में से एक है कपालभाति। मतलब कायदे से कपालभाति प्राणायाम ना हो कर महज एक यौगिक क्रिया है। बाबा रामदेव पहले योगगुरु हुए जिन्होंने कपालभाति को क्रिया ना कह प्राणायाम की तरह प्रचारित करना शुरु किया। इतना ही नहीं इसके फ़ायदे को भी बहुत बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया। साथ ही कपालभाति करने की विधि और मात्रा में भी एक संतुलित एप्रोच को छोड़ ज़्यादा से ज़्यादा करने पे जोर दिया जाने लगा 
कपालभाति के बारे में भ्रामक प्रचार की एक तस्वीर

दावों में दम नहीं  

हाल ही में विश्व योगदिवस के मौक़े पे बाबा रामदेव की संस्था के जरिए कपालभाति पे इसतरह के भ्रामक पोस्टर और फ्लायर सड़कों से लेकर सोशल मीडिया पे फैला दिए गएं। किसी भी एक सामान्य इंसान को इस दावों के पीछे फैलाएं जाने वाले भ्रम का सहज अंदाज़ा लग सकता है। अब ऐसी भ्रांतियों से ना तो हम योग का भला कर पाएंगे, ना ही लोगों का । सवाल है कि :  
  • अगर कपालभाति से 99 फ़ीसदी बीमारियां ठीक की जा सकती है, तो फिर योग के बाकी टूल्स जैसे आसन, दूसरे प्राणायाम, ध्यान इत्यादि का क्या काम ?  
  • कमरदर्द, स्पाइन प्रॉब्लम, घुटने के दर्द जैसी दूसरी शारीरिक दिक्कतों में भला कपालभाति कैसे उपयोगी है ? 
  • कपालभाति हाई ब्लडप्रेशर, हार्ट जनित बीमारियों और कई हद तक अस्थमा में घातक सिद्ध हो सकता है 
  • कपालभाति में इतना जादू है, तो फिर बाकी दूसरे चीज़ों को बताने की ज़रुरत क्या ? फिर बाबा की करोड़ों रुपए की आयुर्वेद प्रोडक्ट का क्या काम? 

गलत कपालभाति और बहुत फास्ट ब्रीदिंग से हो सकता है नुक़सान  

कोई भी चीज़ जो ग़लत हो वो भला सही रिजल्ट कैसे दे सकती है ? किसी भी प्राणायाम या दूसरे यौगिक क्रिया को करने का एक सही-सही तरीक़ा बताया गया है। अगर हम ग़लत पद्धति को सिखाते हैं या सीखते हैं तो उससे कभी भी लाभ नहीं पहुंच सकता। कपालभाति और दूसरे फास्ट ब्रीदिंग की क्रिया हानिकारक हो सकती है, अगर सही तरीक़े का ध्यान नहीं रखा गया। एक क्रिया में बहुत ही ज्यादा तेज़ गति से सांस लेने और छोड़ने का स्टेज भी आता है। कई लोगों को तो ऐसे वक्त में सांस लेने तक में असुविधा महसूस हुई है। बहुत तेज़ गति से किया जाने वाले ये सांस की क्रिया से हाइपर-वेंटिलेशन(Hyperventilation) या ओवर ब्रीदिंग की समस्या हो सकती है। हाइपर-वेंटिलेशन में ब्रेन को या तो ज्यादा या कम ऑक्सीजन पहुंचती है। शरीर में हर वक्त कार्बन डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन की एक निश्चित मात्रा संतुलित रहनी चाहिए। बहुत फास्ट ब्रीदिंग में ये संतुलन बिगड़ने की गुंजाइश बढ़ जाती है और फिर ऐसा ग़लत प्राणायाम या क्रिया लाभ की जगह नुक़सान पहुंचाता है  

यौगिक ग्रंथ क्या कहते हैं ?  

प्राचीन सभी योग शास्त्रों में प्राणायाम का सीधा मतलब सांसों को लयबद्ध तरीके से लंबी और गहरी करने से है। प्राणायाम शब्द से भी साफ है कि प्राण का आयाम देना यानी विस्तार देना ना कि जल्दी-जल्दी सांसें लेना। कपालभाति क्रिया प्राचीन पद्धति नहीं रही, योग के बीच के कालखंड में कपालभाति की क्रिया सामने आती है, वो भी प्राणायाम के तौर पे नहीं। वर्तमान वक्त में इसे अब प्राणायाम के नाम पे प्रचारित कर दिया गया। फास्ट कोई भी सांस लेने की प्रक्रिया योग की प्राचीन नियमों के खिलाफ है।  प्राणायाम को सीखते या सिखाते वक्त कुछ सावधानियां बरतने की हिदायत हमेशा से यौगिक ग्रंथों में दी गई है। हठयोग प्रदीपिका की इन पंक्तियों पे ध्यान दें –  
यथा सिंहो गजो व्याघ्रो भवेद् वश्यः शनैः शनैः। तथैव सेवितो वायुरन्यथा हन्ति साधकम्॥ जैसे सिंह, व्याघ्र और गज को धीरे-धीरे वश में किया जाता है, ऐसे ही, प्राणवायु को धीरे-धीरे प्राणायाम विधि से अपने अधीन करना चाहिए, अन्यथा ये साधक के शरीर को ही रोगग्रस्त कर देता है 
यानी बहुत जल्दी -जल्दी सांस लेना और बहुत ज्यादा करना कहीं से लाभदायक नहीं, जैसा कुछ संस्थाओं और योगगुरुओं के जरिए बताया जा रहा है   
प्राणायामेन युक्तेन सर्व-रोग-क्षयो भवेत्। अयुक्ताभ्यास-योगेन सर्व-रोग-समुद्गमः॥हयो-२.१६॥ सही तरीक़े से किएं गएं प्राणायाम से साधक के सभी शारीरिक-मानसिक रोगों का नाश होता है
इतना ही नहीं ग्रंथ में यहां तक कहा गया है कि ग़लत प्रैक्टिस से कई तरह की समस्याएं, यहां तक कि सिर को भी नुक़सान हो सकता है-  
हिक्का श्वासश् च कासश् च शिरः-कर्णाक्षि-वेदनाः। भवन्ति विविधाः रोगाः पवनस्य प्रकोपतः॥हयो-२.१७॥ ग़लत तरीक़े से किए गएं प्राणायाम से प्रकोपित वायु द्वारा साधक के शरीर में हिचकी, अस्थमा, खांसी, सिर-कान-नेत्रों से संबंधित विविध रोग उत्पन्न हो सकते हैं

क्या है कपालभाति करने का सही तरीक़ा ?  

योगगुरु धीरज जी ने इस विडियो के जरिए कपालभाति करने के सही तरीक़े को बताने के साथ सावधानियां को भी बखूबी बताया है। कपालभाति को लेकर एक हेल्थी बहस यूटूब पे शुरु हो गई है। आप भी अपने अनुभव युटूब पे हमें बांटे, ताकि सही चीज़ें और दूसरे कई अनुभव सामने आएं।
कपालभाति और दूसरे यौगिक क्रिया और प्राणायाम ज़रुर करें, बस ध्यान रहें बहुत तेज़ गति और बहुत ज्यादा ना करें। बेहतर हो आप ज्यादा स्लो ब्रीदिंग पे फोकस करें, जैसे- नाड़ी शोधन प्राणायामशीतली-सीत्कारी प्राणायाम, एब्डोमिनल ब्रीदिंगभ्रामरीऊंकार इत्यादि कहीं ज्यादा शरीर-मन और अाध्यात्मिक मायने में  लाभदायक हैं
नमस्ते  
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. . . . Continued
  1. October 8, 2017

    Give proper time duration for kapalbhati exercise at the age group 63-64

    • October 10, 2017

      Do just 3-5 times and each times 20-30 rounds very slowly. My suggestion it would be better focus on more slow deep breathing like Omkar, Bhramri, Nadi Shodhana Pranayama in this particular age. Namaste

  2. October 8, 2017

    Can I do bhastrika,kapalbhati exercise although I am suffering from blood hypertension 138/85, inguinal hernia at early stage. Suggest few exercise for me regarding the problems.

  3. March 14, 2018

    Sir namaskaram… kapalbhati Khali pet ki jaye ya subah Na ker sakein to Kya subah chai or do biscuit khake kapalbhati kitti der bad kr skte hai….Nd sir ek request hai ki step by step kon se pranayam kiye jayein..

    • August 27, 2018

      खाली पेट बेहतर है .. चाय पीकर आधे घंटे में कर सकते है , चाय ना पीएं खाली पेट तो बेस्ट

  4. July 6, 2018

    I liked the way you teach

    • August 27, 2018

      शुक्रिया रेखा जी .. ऊँ

  5. July 6, 2018

    I liked the way you teach .. everything step by step
    Thank you

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